विनोद कुमार झा
गाँव की कच्ची गलियों में जब भी राधा की चूड़ियों की खनक गूंजती, तो ऐसा लगता मानो कोई मीठी धुन बज उठी हो। उसकी चूड़ियों की खनक में एक अनोखी लय थी, जो सुनने वालों के मन को मोह लेती। राधा की यह पहचान थी—जहाँ वह होती, वहाँ उसकी चूड़ियों की खनक उसकी उपस्थिति का एहसास करा देती।
राधा का मन भी उतना ही निर्मल था जितना उसकी चूड़ियों का संगीत। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी और पूरे गाँव की लाडली। वह पढ़ाई में भी बहुत होशियार थी और गाँव के स्कूल में हमेशा प्रथम आती। मोहन भी उसी स्कूल में पढ़ता था, लेकिन वह राधा से थोड़ा पीछे रहता। दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता था, जो समय के साथ गहराता जा रहा था।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद राधा ने उच्च शिक्षा के लिए शहर के एक बड़े कॉलेज में दाखिला लिया। गाँव से शहर जाना उसके लिए एक नया अनुभव था। बड़ी इमारतें, आधुनिक जीवनशैली और नई दोस्ती—सबकुछ नया था, लेकिन उसके दिल में अब भी मोहन की यादें और गाँव की सादगी बसी हुई थी। शहर में पढ़ते हुए भी वह अक्सर मोहन को पत्र लिखती, पर मोहन का मन धीरे-धीरे उदास रहने लगा। उसे लगता था कि राधा अब शहर के रंग में रंग जाएगी और उसे भूल जाएगी।
समय बीतता गया, राधा ने अपनी पढ़ाई पूरी की और शहर में नौकरी करने का प्रस्ताव भी मिला, लेकिन उसने उसे ठुकरा दिया। वह अपने गाँव वापस लौट आई। यह सुनकर मोहन को बहुत खुशी हुई। गाँव में लौटने के बाद, राधा ने बच्चों को शिक्षित करने के लिए एक छोटा स्कूल खोलने का फैसला किया। उसके इस फैसले ने पूरे गाँव को गौरवान्वित कर दिया।
मोहन भी गाँव में एक छोटा व्यवसाय चला रहा था, और दोनों का मिलना-जुलना फिर से शुरू हो गया। अब वे पहले से अधिक करीब आ गए थे। राधा ने गाँव में शिक्षा और विकास के लिए कई योजनाएँ शुरू कीं, जिनमें मोहन ने भी उसका पूरा साथ दिया। धीरे-धीरे, दोनों को एहसास हुआ कि उनका प्यार केवल बचपन का आकर्षण नहीं था, बल्कि एक गहरी समझ और विश्वास का रिश्ता था।
एक दिन, जब मोहन ने हिम्मत जुटाकर राधा से कहा, "राधा, क्या तुम अपनी इन खनकती चूड़ियों के साथ मेरी ज़िंदगी में भी खनक भर दोगी?" तो राधा के गाल लाल हो गए। उसकी चूड़ियों की खनक तेज़ हो गई, और उसने मुस्कुराकर हाँ कह दी। पूरे गाँव में उनकी प्रेम कहानी की मिठास फैल गई, और उनकी चूड़ियों की खनक हमेशा के लिए एक नए रिश्ते की डोर में बंध गई।
शादी के बाद, जब राधा पहली बार मोहन के घर आई, तो उसने अपने लिए नई चूड़ियां खरीदीं। लेकिन इस बार, मोहन ने उसे एक खास उपहार दिया—सोने की पतली चूड़ियां, जिनमें छोटी-छोटी घंटियां लगी थीं। जब राधा ने उन्हें पहना, तो उनकी खनक पूरे घर में गूंज उठी। मोहन ने मुस्कुराकर कहा, "अब तुम्हारी खनक सिर्फ इस गाँव में नहीं, बल्कि मेरे जीवन में भी सदा गूंजती रहेगी।"
राधा की आँखें खुशी से भर आईं। उसकी चूड़ियों की खनक अब सिर्फ सौंदर्य का प्रतीक नहीं थी, बल्कि उसके और मोहन के प्रेम की अमर ध्वनि बन चुकी थी।