माँ दुर्गा के नौ रूपों के श्लोक: सुनने या पढ़ने से बन जाते हैं बिगड़े काम

विनोद कुमार झा

(जय माता दी)!  माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। नवरात्रि में इनके श्लोकों का पाठ या श्रवण करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और बिगड़े हुए कार्य भी बनने लगते हैं। माँ दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप की महिमा और शक्ति से जुड़े श्लोक अत्यंत प्रभावशाली हैं। इन्हें श्रद्धा और भक्ति के साथ पढ़ने या सुनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। प्रत्येक देवी के एक विशेष रूप, शक्ति और गुण होते हैं। यहाँ पर माता के नौ रूपों के प्रमुख श्लोक, उनके अर्थ और विशेषताओं को प्रस्तुत किया गया है।  

माँ दुर्गा के नौ रूप एवं उनके श्लोक इस प्रकार है:-


1. शैलपुत्री – पर्वतराज हिमालय की पुत्री  

श्लोक: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

अर्थ: माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। ये वृषभ पर सवार हैं और हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं।  

2. ब्रह्मचारिणी – तपस्या की देवी

श्लोक: दधाना करपद्माभ्यां अक्षमाला कमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

अर्थ: माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या और संयम की देवी हैं। ये अपने हाथों में अक्षमाला और कमंडल धारण करती हैं।  

3. चंद्रघंटा – सौम्य और उग्र रूप की देवी 

श्लोक: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥ 

अर्थ: माँ चंद्रघंटा अपने भक्तों के लिए सौम्य, लेकिन असुरों के लिए उग्र रूप धारण करती हैं। ये अपने हाथों में अस्त्र-शस्त्र लिए सिंह पर विराजमान हैं।  

4. कूष्माण्डा – सृष्टि की आदिशक्ति  

श्लोक: सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।  दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

अर्थ:  माँ कूष्माण्डा ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली शक्ति हैं। ये अपने हाथों में अमृत से भरा कलश धारण करती हैं और समस्त शुभता प्रदान करती हैं।  

5. स्कंदमाता – मातृरूप की देवी  

श्लोक:  सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

अर्थ: माँ स्कंदमाता अपने पुत्र भगवान स्कंद (कार्तिकेय) के साथ सिंह पर विराजमान रहती हैं। ये अपने भक्तों को सुख-शांति प्रदान करती हैं।  

6. कात्यायनी – शक्ति और युद्ध की देवी 

श्लोक: चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवरवाहना।  कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

अर्थ: माँ कात्यायनी महिषासुर का वध करने वाली देवी हैं। ये सिंह की सवारी करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।  

7. कालरात्रि – रौद्र रूप की देवी 

श्लोक: एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

अर्थ:  माँ कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयंकर है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं। वे दुष्टों का संहार करने वाली शक्ति हैं।  

8. महागौरी – शांति और सौंदर्य की देवी

श्लोक:  श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदिनी॥ 

अर्थ:  माँ महागौरी अत्यंत उज्ज्वल और सौम्य स्वरूप वाली देवी हैं। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और भक्तों को शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।  

 9. सिद्धिदात्री – सिद्धियों की देवी

श्लोक: सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥ 

अर्थ:  माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। वे भक्तों को आध्यात्मिक और भौतिक सिद्धियाँ प्रदान करती हैं।  

माँ दुर्गा के ये नौ स्वरूप भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में इनकी पूजा करने से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

जय माता दी!

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