रायसीना डायलॉग: भारत के वैश्विक कूटनीति में बढ़ते कदम

 विनोद कुमार झा


तीन दिवसीय रायसीना डायलॉग का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया, जिसमें न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस संवाद के 10वें संस्करण में 125 देशों के प्रतिनिधियों, 20 विदेश मंत्रियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह सम्मेलन अब महत्वपूर्ण वैश्विक मंच बन चुका है।  

रायसीना डायलॉग को अक्सर एशियाई 'शांग्री-ला डायलॉग' कहा जाता है, लेकिन इस बार इसे एक वैश्विक सम्मेलन के रूप में मान्यता मिली है। पोलैंड के विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोस्जेव्स्की ने इसे एशियाई नहीं, बल्कि वैश्विक संवाद बताया, जिसमें अमेरिका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। यह भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।  प्रधानमंत्री लक्सन ने इस मंच से भारत और न्यूजीलैंड के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 200 वर्षों से भारतीय समुदाय न्यूजीलैंड का अभिन्न अंग रहा है और आज ऑकलैंड की 11% आबादी भारतीय मूल की है। यह भारत की  सॉफ्ट पावर और प्रवासी भारतीयों की वैश्विक प्रभावशाली उपस्थिति का परिचायक है।  

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में प्रयासरत है। यह भारत के लिए संतुलित कूटनीति का अवसर है, क्योंकि भारत ने अब तक इस संघर्ष में तटस्थ रुख अपनाया है और शांति वार्ता को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।  भारत और पोलैंड के बीच हाल ही में हुई  रणनीतिक साझेदारी भी इस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण बिंदु रही। पोलैंड ने भारत के साथ सुरक्षा, सैन्य, व्यापार, आईटी और खाद्य उत्पादन में सहयोग की इच्छा जताई। यह भारत की यूरोपीय संघ में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।  इस बार ताइवान का एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी इस सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है। यह पहली बार होगा जब ताइवान इस स्तर पर भारत के किसी उच्चस्तरीय मंच पर शामिल होगा। यह चीन के साथ भारत के जटिल संबंधों और इंडो-पैसिफिक में भारत की कूटनीतिक स्थिति को और अधिक परिभाषित कर सकता है।  

रायसीना डायलॉग अब केवल एक भारतीय सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह भारत की बुद्धिमत्तापूर्ण विदेश नीति, वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का मंच है। भारत इस सम्मेलन के माध्यम से न केवल अपने अर्थशास्त्र और भू-राजनीति को दिशा दे रहा है, बल्कि एक संतुलित वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

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