विनोद कुमार झा
मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
इस मंत्र में जितने भी शब्द है उसका का अर्थ इस प्रकार है:-
ॐ : परम शक्ति का प्रतीक है।
ऐं : सरस्वती का बीज मंत्र है, जो बुद्धि व ज्ञान देता है।
ह्रीं : महालक्ष्मी का बीज मंत्र है, जो ऐश्वर्य व समृद्धि देता है।
क्लीं : महाकाली का बीज मंत्र है, जो शत्रुनाशक व रक्षक होता है।
चामुण्डायै : चामुण्डा देवी (दुर्गा) का आह्वान।
विच्चे : विजय और सिद्धि प्रदान करने वाला शब्द।
कथा: प्राचीन काल में रुरु नामक एक असुर ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से अजेय होने का वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान पाकर उसने तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया। देवता, ऋषि-मुनि और मानव अत्यंत भयभीत हो गए और सभी ने मिलकर माता दुर्गा की शरण ली।
माता ने आश्वासन दिया और चामुण्डा रूप में प्रकट होकर रुरु असुर का वध किया। इस दौरान उन्होंने ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का उच्चारण किया। इस मंत्र के प्रभाव से देवी ने अपार शक्ति प्राप्त की और असुर को परास्त कर दिया। इसके बाद देवताओं और ऋषियों ने देवी की स्तुति की और यह मंत्र दिव्य और सिद्ध माना गया। तब से नवरात्रि में इस मंत्र का जाप करने से साधक को माता की कृपा प्राप्त होती है, समस्त कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सफलता एवं शांति आती है।
इस मंत्र के जप के लाभ
1. माता दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
2. सभी प्रकार के संकट और भय समाप्त होते हैं।
3. घर में सुख-समृद्धि एवं शांति बनी रहती है।
4. शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है।
5. साधक को आध्यात्मिक शक्ति और आत्मबल प्राप्त होता है।
नवरात्रि में जप की विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- देवी दुर्गा के चित्र या मूर्ति के सामने दीप जलाएं।
- इस मंत्र का 108 बार या 1008 बार जाप करें।
- अंत में माता को पुष्प अर्पित कर आरती करें।
यदि इस मंत्र का श्रद्धा और नियमपूर्वक जप किया जाए, तो माता की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।