बिहार के विकास के संकल्प और जल संरक्षण की महत्ता

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार दिवस के अवसर पर बिहार की जनता को शुभकामनाएं देते हुए राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इसे वीरों और महान विभूतियों की भूमि बताते हुए बिहार की गौरवशाली परंपरा की सराहना की। यह बयान न केवल बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि केंद्र सरकार राज्य के विकास को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।  

बिहार, जो कभी प्राचीन भारत में शिक्षा, राजनीति और संस्कृति का केंद्र रहा, आज तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। राज्य में बुनियादी ढांचे, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, विशेष रूप से बेरोजगारी, पलायन, कृषि संकट और बाढ़ जैसी समस्याएं। यदि बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाना है, तो शिक्षा, उद्यमिता और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना होगा।  

प्रधानमंत्री ने इसी अवसर पर विश्व जल दिवस का महत्व भी रेखांकित किया और जल संरक्षण को भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक बताया। जल संकट आज एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। बिहार में गंगा जैसी प्रमुख नदियां होने के बावजूद जल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। बाढ़ और सूखे की दोहरी मार झेलने वाले इस राज्य में जल संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग के लिए मजबूत नीतियों की आवश्यकता है।  

बिहार सरकार और केंद्र सरकार को मिलकर जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। जल संचयन, वर्षा जल संग्रहण और नदी पुनर्जीवन परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी होगी। इसके अलावा, आम जनता को भी जल बचाने और जिम्मेदारी से उपयोग करने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।  

बिहार का विकास और जल संरक्षण—दोनों ही विषय केवल सरकारी योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें धरातल पर प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए। जब सरकार, समाज और नागरिक एकजुट होकर इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करेंगे, तभी बिहार एक विकसित, समृद्ध और जल-सुरक्षित राज्य बन सकेगा।

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