विनोद कुमार झा
भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर अपनी मजबूती का परिचय दिया है। मंगलवार को सेंसेक्स 1,131 अंक की शानदार बढ़त के साथ 75,000 के पार बंद हुआ, जो पिछले 14 कारोबारी सत्रों के बाद इस स्तर पर पहुंचा। निफ्टी भी 325.55 अंकों की बढ़त के साथ 22,834.30 पर बंद हुआ। यह बाजार के प्रति बढ़ते निवेशक विश्वास और मजबूत आर्थिक संकेतकों का प्रतीक है।
बढ़त के पीछे प्रमुख कारण
1. वैश्विक संकेतों का प्रभाव: अमेरिका और चीन से आए मजबूत खुदरा बिक्री के आंकड़ों ने वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बनाया, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। यूरोपीय और एशियाई बाजारों की मजबूती ने घरेलू निवेशकों को और अधिक उत्साहित किया।
2. संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी: लंबे समय बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 694.57 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी 2,534.75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।
3. तिमाही नतीजों की मजबूती: घरेलू कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे बाजार की इस मजबूती के पीछे एक और प्रमुख कारण रहे। यह संकेत देता है कि भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है और निवेशकों को उनके प्रदर्शन पर भरोसा बढ़ रहा है।
4. सेक्टोरल मजबूती: सेंसेक्स की 30 में से 26 कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए, जिसमें आईसीआईसीआई बैंक (3.25%), एमएंडएम (3.27%), टाटा मोटर्स (2.86%), एलएंडटी (2.77%) और सनफार्मा (2.49%) प्रमुख रूप से आगे रहे।
5. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर में कमजोरी: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिली, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
शेयर बाजार की यह मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं। वर्तमान में कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का रुझान केवल ब्लू-चिप कंपनियों तक सीमित नहीं है।
यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी का यह रुझान जारी रहता है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार और नई ऊंचाइयों को छू सकता है। हालांकि, बाजार में हाल ही में जारी गिरावट के कारण मूल्यांकन आकर्षक हो गया था, जिससे निवेशकों को खरीदारी का मौका मिला। इस तेजी को जारी रखने के लिए स्थिर आर्थिक नीतियां, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और वैश्विक अनिश्चितताओं का प्रभाव सीमित रखना आवश्यक होगा। बैंकिंग, ऑटो, फार्मा और कैपिटल गुड्स सेक्टर में निवेशकों की रुचि बढ़ी है, जिससे संकेत मिलता है कि इन क्षेत्रों में आगे भी ग्रोथ की संभावना बनी रह सकती है।
भारतीय शेयर बाजार का यह उछाल केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह निवेशकों के विश्वास, मजबूत आर्थिक नीतियों और वैश्विक वित्तीय स्थिरता का प्रतिबिंब है। यदि यह गति बनी रहती है और बाजार में संतुलन कायम रहता है, तो आने वाले महीनों में सेंसेक्स और निफ्टी नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। हालांकि, निवेशकों को अपनी रणनीति बनाते समय सतर्कता बरतनी चाहिए और बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। शेयर बाजार में अवसर बहुत हैं, लेकिन विवेकपूर्ण निर्णय ही सफलता की कुंजी है।