विनोद कुमार झा
चाँदनी रात, घना जंगल और उस सन्नाटे में अकेला खड़ा बबूल का वृक्ष… दूर से देखने पर एक आम पेड़ की तरह, लेकिन जैसे-जैसे आप पास जाते हैं, ठंडी हवा का एक झोंका आपके रोंगटे खड़े कर देता है। पत्तों के सरसराने की आवाज़, कहीं दूर किसी के हँसने या रोने की हल्की गूँज… क्या ये सिर्फ़ मन का वहम है? या फिर सच में कोई छायामयी शक्ति अशोक के वृक्ष के नीचे वास करती है?
हजारों सालों से भारत में एक मान्यता चली आ रही है "रात के समय बबूल के वृक्ष के पास न जाएं! लेकिन क्यों? क्या यह सिर्फ़ एक अंधविश्वास है, या इसके पीछे कोई ऐसा रहस्य है जो रोंगटे खड़े कर सकता है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यक्षिणियाँ अदृश्य दिव्य प्राणियाँ बबूल के वृक्षों के प्रति विशेष आकर्षण रखती हैं। इनका निवास पर्वतों, नदियों, तालाबों, वनों और पत्थरों में भी माना जाता है, लेकिन बबूल वृक्ष के नीचे इनकी उपस्थिति सबसे प्रबल होती है। कहा जाता है कि यक्षिणियाँ मनुष्यों से दूर एकांत में रहना पसंद करती हैं। लेकिन अगर कोई अनजाने में उनके स्थान पर पहुँच जाए, तो वह उनकी उपस्थिति को महसूस कर सकता है। कुछ लोककथाएँ कहती हैं कि वे सुंदर स्त्रियों के रूप में प्रकट होती हैं, तो कुछ कहानियाँ डरावने अनुभवों की गवाही देती हैं जहाँ कोई वहाँ गया, और फिर कभी नहीं लौटा!
अगर किसी ने रात के समय बबूल के वृक्ष के पास जाने की गलती कर दी, तो उसके साथ कुछ अजीब घटित हो सकता है: अचानक ठंडी हवा का बहना मानो कोई पास खड़ा हो और साँसें ले रहा हो, अदृश्य फुसफुसाहटें कभी कोई हँसी, कभी कोई पुकार, लेकिन जब पलटकर देखो, तो कुछ नहीं, भ्रम और बेहोशी लोगों को महसूस होता है कि कोई उनका नाम लेकर बुला रहा है, और फिर धीरे-धीरे वे अपनी चेतना खो देते हैं। जो लोग रात में अशोक वृक्ष के पास गए, वे बाद में अजीब सपनों से परेशान रहते हैं। कुछ सपनों में कोई स्त्री मुस्कुराते हुए दिखती है, तो कुछ में किसी की परछाईं उनका पीछा करती है। कुछ लोगों का मानना है कि यह सब महज़ कल्पना और अंधविश्वास है। लेकिन कई कहानियाँ, कई अनुभव, और कई अनसुलझे रहस्य इस ओर इशारा करते हैं कि बबूल का वृक्ष सिर्फ़ एक साधारण वृक्ष नहीं है।
अगर आप कभी किसी सुनसान जगह पर, रात के अंधेरे में, किसी विशाल बबूल वृक्ष के नीचे खड़े हों और अचानक आपको किसी की हल्की हँसी सुनाई दे… तो क्या आप पलटकर देखेंगे? या फिर भाग खड़े होंगे? फैसला आपका है…! पुरानी मान्यताओं और लोककथाओं के अलावा, कुछ वास्तविक घटनाएँ भी इस डरावनी धारणा को और मजबूत करती हैं। कई लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने अशोक के पेड़ के नीचे अजीबो-गरीब अनुभव किए हैं।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि उसके दादा ने गाँव के बाहर खड़े एक विशाल बबूल वृक्ष के नीचे रात बिताने की गलती कर दी। अगली सुबह जब वे घर लौटे, तो उनका शरीर ठंडा था, होंठ नीले पड़ चुके थे, और उनकी आवाज़ हमेशा के लिए चली गई। वे जीवनभर कुछ बोल नहीं पाए। वहीं दूसरी ओर केरल के एक पुराने मंदिर के पास स्थित बबूल के वृक्ष के नीचे रात में अजीब गतिविधियाँ देखी गईं। वहाँ रात के समय एक स्त्री जैसी परछाईं दिखने का दावा किया जाता है, जो धीरे-धीरे पेड़ के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। कई लोगों ने कहा कि जो भी उस छाया को देखने की कोशिश करता है, वह भयंकर बुखार से पीड़ित हो जाता है।
इसी तरह मुंबई का एक अजीब मामला देखने को मिला एक व्यक्ति जो देर रात ऑफिस से लौट रहा था, उसने सड़क किनारे लगे एक बबूल वृक्ष के नीचे एक सुंदर युवती को देखा। जब उसने कार रोककर उसे लिफ्ट देने की पेशकश की, तो युवती मुस्कुराई और अचानक हवा में विलीन हो गई। उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसके बाद कई महीनों तक वह युवती उसे सपनों में दिखती रही।
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सब सिर्फ़ मनोवैज्ञानिक प्रभाव है। रात के अंधेरे और एकांत स्थानों पर हमारे मस्तिष्क में डर की भावना प्रबल हो जाती है, जिससे हमें चीजें महसूस होने लगती हैं। इसके अलावा, कुछ पेड़ों से निकलने वाली गैसें भी भ्रम और मतिभ्रम उत्पन्न कर सकती हैं। लेकिन क्या यह सभी घटनाओं को समझाने के लिए पर्याप्त है?
अगर आप किसी सुनसान जगह पर बबूल के वृक्ष के पास फँस जाएँ, तो कुछ सावधानियाँ बरत सकते हैं: शांत रहें और डर को हावी न होने दें। किसी मंत्र या प्रार्थना का जाप करें, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। वृक्ष के पास अधिक देर तक न रुकें और वहाँ से जल्द निकलने की कोशिश करें। अपने मन को भटकाने के लिए कोई ध्यान खींचने वाली चीज़ (जैसे मोबाइल या माला) साथ रखें।
बबूल के वृक्ष और यक्षिणियों का रहस्य सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। कोई इसे सिर्फ़ किस्से-कहानियाँ मानता है, तो कोई इसे हकीकत। लेकिन एक बात तय है रात के अंधेरे में अशोक के वृक्ष के नीचे जाने की हिम्मत हर कोई नहीं कर सकता। तो अगली बार जब आप किसी घने जंगल या किसी सुनसान सड़क पर बबूल के वृक्ष के पास से गुजरें… और आपको लगे कि कोई आपको देख रहा है… तो क्या आप तेज़ कदमों से निकल जाएँगे, या रुककर पीछे मुड़कर देखने की गलती करेंगे? क्योंकि कुछ रहस्य को बस रहस्य ही रहने देने चाहिए…!