भारत की द्रुत गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था, एक आर्थिक चमत्कार

भारत ने पिछले एक दशक में जिस आर्थिक प्रगति को हासिल किया है, वह किसी भी बड़े वैश्विक देश के लिए प्रेरणादायक है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह 105% की वृद्धि दर दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे अधिक है। यदि यही रफ्तार बनी रही, तो 2025 तक भारत जापान को और 2027 तक जर्मनी को पीछे छोड़ सकता है।  

भारत की इस असाधारण आर्थिक वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ऐसे सुधार लागू किए, जिन्होंने आर्थिक गतिविधियों को गति दी और नए अवसरों का द्वार खोला। नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (GST) और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों ने आर्थिक पारदर्शिता बढ़ाई और औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूती दी। वित्तीय समावेशन के तहत प्रधानमंत्री जन धन योजना और डिजिटल भुगतान प्रणाली ने उन लोगों को भी आर्थिक धारा में शामिल किया, जो पहले इससे अछूते थे।  अर्थशास्त्री के अनुसार, इस तेज आर्थिक वृद्धि का श्रेय सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों को जाता है। कृषि, फिनटेक, शासन, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। विशेष रूप से, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना ने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया है, जिससे रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि संभव हुई।  

IMF के अनुसार, पिछले दस वर्षों में चीन की अर्थव्यवस्था में 76% और जर्मनी की अर्थव्यवस्था में मात्र 44% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि भारत ने 105% की वृद्धि हासिल की। इसका अर्थ यह है कि भारत अब विश्व आर्थिक मंच पर अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार है। अमित मालवीय ने भी इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए इसे निर्णायक नेतृत्व और सरकार की मेहनत का नतीजा बताया। हालांकि भारत की आर्थिक यात्रा सराहनीय रही है, लेकिन आगे की राह में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बढ़ती जनसंख्या, बेरोजगारी, शिक्षा और कौशल विकास जैसी समस्याएं अभी भी मौजूद हैं। सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचे।  

यदि भारत आने वाले वर्षों में अपनी आर्थिक वृद्धि दर को बनाए रखता है और आवश्यक सुधार जारी रखता है, तो यह न केवल वैश्विक आर्थिक शक्ति बनेगा, बल्कि एक नई विश्व व्यवस्था में अपनी निर्णायक भूमिका भी सुनिश्चित करेगा। भारत का आर्थिक चमत्कार भविष्य में और भी बड़े अवसरों को जन्म देगा, जिससे करोड़ों लोगों का जीवन बेहतर होगा।

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