हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच कोई प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग का भाव है। यह कथन भारत की भाषाई विविधता और एकता को रेखांकित करता है। भाषा के नाम पर विभाजन की राजनीति करने वालों को आगाह करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें भाषा को जोड़ने का माध्यम बनाना चाहिए, न कि देश को तोड़ने का।
रक्षा मंत्री ने तमिलनाडु की वीरांगना रानी वेलु नचियार को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में इस संदेश को साझा किया। रानी वेलु नचियार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली ऐसी रानी थीं जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। उनके जीवन से हमें यह सीखने को मिलता है कि नेतृत्व केवल सत्ता में नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने में निहित होता है।महिलाओं की भागीदारी को लेकर राजनाथ सिंह ने एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया कि जब भी भारत के सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, तब देश का नया उत्थान हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को जीवन के हर क्षेत्र में अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे देश एक नई दिशा में अग्रसर हो रहा है। खासतौर पर सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
भाषा को लेकर विवाद खड़ा करने वालों को यह समझना चाहिए कि सभी भारतीय भाषाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। तमिल और हिंदी के नाम पर संघर्ष का कोई औचित्य नहीं है, बल्कि दोनों भाषाएं भारतीय संस्कृति और इतिहास की धरोहर हैं। जिस प्रकार काशी तमिल संगमम् जैसे आयोजनों के माध्यम से भाषाई एकता को बल दिया जा रहा है, वैसे ही अन्य प्रयासों से भी देश में भाषाई सौहार्द को बढ़ावा देना चाहिए। इसलिए, हमें भाषा को विभाजन की रेखा के बजाय एक सेतु की तरह देखना चाहिए, जो पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरो सके। हिंदी हो, तमिल हो या कोई अन्य भारतीय भाषा – सभी का समान रूप से सम्मान होना चाहिए और इनके संवर्धन के लिए मिलकर प्रयास करने चाहिए।