विनोद कुमार झा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की हालिया बैठक भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर बनी। इस बातचीत में आतंकवाद, अलगाववाद और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। खासतौर पर न्यूजीलैंड में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ भारत की चिंता को प्रमुखता से उठाया गया।
भारत ने हमेशा आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे वह 2019 का क्राइस्टचर्च हमला हो या 2008 का मुंबई हमला, आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। यह संदेश न केवल न्यूजीलैंड के लिए बल्कि उन सभी देशों के लिए है, जो आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में लचीला रुख अपनाते हैं।
हाल के वर्षों में न्यूजीलैंड सहित कई पश्चिमी देशों में खालिस्तान समर्थक तत्वों की सक्रियता बढ़ी है। ये समूह भारतीय संस्थानों और प्रवासी भारतीय समुदाय के खिलाफ हिंसा और उकसावे की घटनाओं में शामिल रहे हैं। इससे न केवल भारत की संप्रभुता को खतरा है, बल्कि यह न्यूजीलैंड की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है।
पीएम मोदी द्वारा यह मुद्दा उठाना दर्शाता है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता के मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक संकेत है कि किसी भी देश को आतंकवाद और अलगाववादी तत्वों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं बनने देना चाहिए। न्यूजीलैंड सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह ऐसे तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी और भारत के साथ सहयोग बढ़ाएगी।
भारत और न्यूजीलैंड ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह क्षेत्र विश्व व्यापार और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन की विस्तारवादी नीतियों के चलते यहां सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत का यह रुख महत्वपूर्ण है। दोनों देशों का यह सहयोग अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्र व्यापार मार्गों की रक्षा को मजबूत करेगा।
इस बैठक में आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने, आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। भारत और न्यूजीलैंड दोनों ने संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
यह स्पष्ट है कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा है। ऐसे में, सभी लोकतांत्रिक देशों को मिलकर इसे जड़ से समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने वाले तत्वों पर भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुई यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ एकजुटता का भी संकेत देगी। यह आवश्यक है कि सभी देश मिलकर आतंकी संगठनों और अलगाववादी तत्वों को किसी भी प्रकार की राजनीतिक या आर्थिक सहायता देने से बचें।
पीएम मोदी का यह रुख भारत की दृढ़ कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अब यह न्यूजीलैंड सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह खालिस्तानी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करे और भारत की चिंताओं को गंभीरता से ले। केवल तभी दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और आपसी विश्वास को और मजबूत किया जा सकेगा।