कहानी : भंवर बीच जीवन

विनोद कुमार झा


रात के अंधेरे में शहर की रोशनी जगमगा रही थी। ऊँची इमारतों के साये में एक नई दुनिया थी जहाँ सपने पलते थे, लेकिन साथ ही भटकने का खतरा भी था। तेज़ रफ्तार गाड़ियों की आवाज़, रॉक म्यूजिक से गूंजते कैफे, और सोशल मीडिया पर चमकते प्रोफाइल… यही था इस दुनिया का नया सच।  इसी दुनिया में कदम रखा था रवि ने एक छोटे से गाँव से आया लड़का, जिसकी आँखों में बड़े सपने थे। माता-पिता ने उसे शहर की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में भेजा था, उम्मीदों के साथ कि उनका बेटा ऊँचाइयाँ छुएगा। लेकिन उसे नहीं पता था कि यह शहर जितने अवसर देगा, उतने ही भटकाने वाले रास्ते भी खोलेगा।  

नई दोस्ती, चमकती हुई पार्टियाँ, और आधुनिक लाइफस्टाइल धीरे-धीरे यह सब उसे अपने भंवर में खींचने लगे। क्या रवि अपने सपनों की राह पर टिका रह पाएगा? या यह शहर उसे भी उसी भीड़ का हिस्सा बना देगा, जो हर साल हजारों सपनों को निगल जाता है?  यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हर उस युवा की हकीकत है जो सपनों के शहर में आता है सफलता की तलाश में, लेकिन कभी-कभी रास्ता ही भूल जाता है…

रवि एक मध्यमवर्गीय परिवार से था, जिसे उसके माता-पिता ने बड़े अरमानों के साथ शहर की सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी में पढ़ने भेजा था। गांव में उसके माता-पिता ने सपने संजोए थे कि बेटा अच्छी पढ़ाई कर एक सफल इंसान बनेगा। लेकिन शहर की चकाचौंध, नई दोस्ती, और आधुनिक जीवनशैली ने उसे धीरे-धीरे अपने भंवर में खींच लिया।  

यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के बाद, शुरू में रवि ने पूरी मेहनत से पढ़ाई की, लेकिन जल्द ही उसे नए दोस्तों का साथ मिला, जिनकी दुनिया पढ़ाई से ज्यादा पार्टियों, घूमने-फिरने और मौज-मस्ती में घूमती थी। धीरे-धीरे, वह भी इस रंग में रंगने लगा।  पहले उसने सोचा कि थोड़ी मस्ती करने में क्या बुराई है? लेकिन यह 'थोड़ी मस्ती' धीरे-धीरे उसकी आदत बन गई। रातभर पार्टी, सोशल मीडिया पर मशहूर होने की चाह, और दिखावे की जिंदगी ने उसे पढ़ाई से दूर कर दिया। क्लास मिस होने लगे, असाइनमेंट अधूरे रहने लगे, और ग्रेड्स गिरने लगे।  

समय बीतता गया, और सेमेस्टर खत्म होने पर रिजल्ट आया। रवि का रिजल्ट बेहद खराब था। यह उसके लिए एक बड़ा झटका था। उसने पहली बार महसूस किया कि वह एक ऐसे भंवर में फंस चुका है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा था।  लेकिन किस्मत से, उसके एक सीनियर, रोहित, ने उसे संभालने का जिम्मा उठाया। रोहित ने उसे समझाया, "यह शहर तुम्हें भटका सकता है, लेकिन तुम्हारे पास वापस रास्ते पर आने का मौका हमेशा होता है।" रवि ने अपने माता-पिता की मेहनत और सपनों को याद किया। उसने अपने अंदर की आग को फिर से जलाया।  

अगले कुछ महीनों में, रवि ने अपनी दिनचर्या बदली। उसने खुद को अनुशासन में रखा, सोशल मीडिया और अनावश्यक दोस्तियों से दूरी बनाई, और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। धीरे-धीरे, उसका प्रदर्शन सुधरने लगा। अगली परीक्षाओं में उसने शानदार रिजल्ट हासिल किया।  

"भंवर से बाहर निकलने की सबसे बड़ी ताकत इंसान के खुद के अंदर होती है।" 

यह कहानी सिर्फ रवि की नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं की है जो शहर की चकाचौंध और दिखावे के भंवर में फंसकर अपने असली मकसद से भटक जाते हैं। लेकिन सही समय पर सही फैसले लेकर कोई भी अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर ला सकता है।  

रवि ने जब से अपनी ज़िंदगी में बदलाव लाने का फैसला किया, तब से उसकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी। अब वह सुबह जल्दी उठता, क्लास में ध्यान देता और हर विषय को गंभीरता से पढ़ने लगा। लेकिन बदलाव आसान नहीं होता। पुराने दोस्त उसे बार-बार अपने साथ खींचने की कोशिश करते, नए लालच और बहाने सामने आते।  

एक दिन, जब वह लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहा था, तभी उसके दोस्त विशाल ने आकर कहा, "यार, आज रात एक जबरदस्त पार्टी है। तू भी चल न, बस एक रात की बात है!"  रवि के मन में कुछ पलों के लिए पुरानी यादें ताज़ा हो गईं। लेकिन फिर उसने अपने अंदर की आवाज़ सुनी— क्या एक रात की मस्ती मेरी मेहनत को फिर से बर्बाद कर देगी? उसने मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं यार, अब मैं अपनी असली लड़ाई लड़ रहा हूँ खुद से!" 

रवि ने ठान लिया था कि वह सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व को भी निखारेगा। उसने कॉलेज के डिबेट क्लब को जॉइन किया, खेलकूद में हिस्सा लेना शुरू किया, और सबसे बड़ी बात—अपने सीनियर रोहित के मार्गदर्शन में गरीब बच्चों को पढ़ाने लगा।  धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाने लगी। अगले सेमेस्टर में उसने कॉलेज टॉप 10 स्टूडेंट्स में अपनी जगह बना ली। प्रोफेसर उसकी मेहनत की सराहना करने लगे, और उसे कॉलेज प्लेसमेंट सेल से भी ऑफर मिलने लगे।  

जब रवि अपने रिजल्ट के साथ घर लौटा, तो उसके माता-पिता की आँखों में गर्व के आँसू थे। पिता ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, "बेटा, आज तूने साबित कर दिया कि असली जीत वही होती है जो संघर्ष के बाद मिलती है।" 

रवि ने मुस्कुराकर कहा, "हाँ पापा, मैं समझ गया हूँ कि ज़िंदगी में असली मज़ा भटकने में नहीं, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने में है।"  रवि की कहानी सिर्फ उसकी अपनी नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं की है जो कभी न कभी भटक जाते हैं। लेकिन अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी भंवर से बाहर निकल सकता है और अपने सपनों को हकीकत बना सकता है।"संघर्ष जितना बड़ा होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी!"

रवि की मेहनत रंग ला रही थी। अब वह सिर्फ एक अच्छा छात्र ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत भी बन चुका था। कॉलेज में उसके बदलाव की चर्चा होने लगी। जो लोग पहले उसे भटकाने में लगे थे, वे भी अब उसकी मेहनत की तारीफ करने लगे।  

लेकिन ज़िंदगी हमेशा सीधी राह पर नहीं चलती। एक दिन कॉलेज में एक बड़ी कंपनी का प्लेसमेंट ड्राइव हुआ। रवि ने भी इंटरव्यू दिया। सबको यकीन था कि उसे आसानी से सिलेक्ट कर लिया जाएगा, लेकिन जब नतीजे आए, तो उसका नाम लिस्ट में नहीं था।  यह उसके लिए बड़ा झटका था। उसने इतनी मेहनत की थी, फिर भी सफलता हाथ नहीं लगी। निराशा ने उसे घेर लिया। लेकिन तभी उसे रोहित का एक पुराना वाक्य याद आया :-  "सफलता कभी भी अंतिम नहीं होती, और असफलता कभी भी घातक नहीं होती। मायने रखता है सिर्फ तुम्हारा साहस।"

रवि ने ठान लिया कि वह हार नहीं मानेगा। उसने अपनी कमियों को पहचाना और खुद को और बेहतर बनाने में जुट गया।  कुछ महीनों बाद, एक और बड़ी कंपनी का प्लेसमेंट ड्राइव हुआ। इस बार रवि ने पूरी तैयारी के साथ इंटरव्यू दिया। जब नतीजे आए, तो न सिर्फ उसका सिलेक्शन हुआ, बल्कि उसे सबसे अच्छी सैलरी पैकेज भी मिला!  जिस दिन उसने अपने माता-पिता को यह खुशखबरी दी, उनकी आँखों में गर्व और खुशी के आँसू थे। माँ ने उसे गले लगाकर कहा, "तूने साबित कर दिया कि सच्ची मेहनत कभी बेकार नहीं जाती!"

रवि अब एक सफल प्रोफेशनल बन चुका था, लेकिन उसने एक बात तय कर ली थी—वह उन युवाओं की मदद करेगा जो कभी उसी की तरह भटक गए थे। उसने अपने कॉलेज में एक मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू किया, जहाँ वह नए छात्रों को सही रास्ता दिखाने के लिए अपने अनुभव साझा करता था।  

"भंवर से बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन नामुमकिन नहीं। सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी अपनी मंज़िल तक पहुँच सकता है।"  यह कहानी हर उन युवाओं की है जो कभी राह से भटक जाता है। लेकिन अगर हौसला मजबूत हो, तो भंवर भी तुम्हें रोक नहीं सकता!  शिक्षा ही सफलता की असली चाबी है, इसे खोने मत दो!


Post a Comment

Previous Post Next Post