नवरात्रि में कामाख्या देवी की करें यात्रा दूर होगी बाधाएं!

विनोद कुमार झा

कामाख्या देवी शक्ति पीठों में से एक हैं और तांत्रिक साधना के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। यह मंदिर असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित है। देवी सती के अंग जहां-जहां गिरे थे, वे शक्ति पीठ कहलाए, और मान्यता है कि कामाख्या में माता का योनि अंग गिरा था। यहां मां को कामाख्या, महाविद्या, त्रिपुरासुंदरी, मातंगी और भुवनेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।  

कामाख्या देवी मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां का "अंबुबाची मेला" है, लेकिन नवरात्रि के दौरान भी इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। शक्तिपूजा और तांत्रिक विधियों से मां की साधना करने वाले साधकों के लिए यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 

 कैसे पहुंचे कामाख्या देवी मंदिर?

1. वायु मार्ग (हवाई यात्रा) : निकटतम हवाई अड्डा: लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गुवाहाटी और हवाई अड्डे से मंदिर तक की दूरी लगभग 20 किमी है, जिसे टैक्सी या कैब के माध्यम से तय किया जा सकता है।  

2. रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा) :निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन। गुवाहाटी स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 8 किमी है। यहां से टैक्सी, ऑटो, या लोकल बस से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।  

3. सड़क मार्ग (बस/टैक्सी से यात्रा) : गुवाहाटी भारत के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।  असम राज्य परिवहन की बसें और प्राइवेट टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।  

नवरात्रि के दौरान यात्रा के विशेष टिप्स

 सुबह जल्दी जाएं: नवरात्रि के दौरान भीड़ अधिक होती है, इसलिए दर्शन के लिए सुबह जल्दी पहुंचना अच्छा रहेगा।  

 ऑनलाइन बुकिंग करें : मंदिर में विशेष पूजा के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।  

तांत्रिक अनुष्ठानों का ध्यान रखें : कामाख्या मंदिर में कुछ विशेष तांत्रिक अनुष्ठान होते हैं, जिनके दौरान मंदिर में प्रवेश पर रोक हो सकती है।  

पर्यटन स्थलों की यात्रा करें : नीलांचल पहाड़ी का सौंदर्य देखते हुए गुवाहाटी के अन्य दर्शनीय स्थल जैसे उमानंद मंदिर, नवग्रह मंदिर और ब्रह्मपुत्र नदी की सैर भी की जा सकती है।  

कामाख्या देवी की यात्रा शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम है। नवरात्रि के दौरान यहां जाने से साधकों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। माता रानी का आशीर्वाद सभी पर बना रहे!  जय मां कामाख्या!

Post a Comment

Previous Post Next Post