कहानी: जाम से टकराते जाम...

 विनोद कुमार झा


शहर की हलचल भरी गलियों में, जहाँ रात की रंगीन रोशनी शराब के गिलासों में घुल जाती थी, वहीं एक युवा लड़का, अर्जुन, अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। कॉलेज में दाखिला मिलने की खुशी उसके दोस्तों के साथ जश्न मनाने के बहाने में बदल गई। पहले यह सिर्फ एक मज़ाक था, "एक जाम से क्या होगा?" लेकिन धीरे-धीरे यह एक आदत बन गई, और फिर एक ऐसी लत, जिसने उसके सपनों की नींव को हिला कर रख दिया।

अर्जुन हमेशा से पढ़ाई में अच्छा था। माता-पिता को उस पर गर्व था, और उन्होंने उसे बड़े सपनों के साथ शहर भेजा था। लेकिन जैसे-जैसे कॉलेज की दुनिया में उसकी दोस्ती उन लड़कों से हुई जो हर रात जश्न मनाने को ही जिंदगी समझते थे, वैसे-वैसे उसकी प्राथमिकताएँ बदलने लगीं।

"अरे यार, जिंदगी एक ही बार मिलती है! जी भर कर जियो। चल, आज एक पैग और लगा लेते हैं।"

शुरू में अर्जुन हिचकिचाता था, लेकिन धीरे-धीरे शराब उसके जीवन का हिस्सा बनती गई। पढ़ाई की जगह देर रात की पार्टियाँ और दोस्तों के साथ बैठकर शराब पीना उसकी दिनचर्या बन गई।

पहले सेमेस्टर में अर्जुन ने अच्छे अंक लाए, लेकिन धीरे-धीरे उसकी उपस्थिति कम होने लगी। असाइनमेंट छूटने लगे, और परीक्षा के नतीजे गिरते गए। घर से फोन आता तो वह झूठ बोल देता, "सब ठीक है माँ, चिंता मत करो।"

पर अंदर ही अंदर, वह खुद को खोता जा रहा था। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे बढ़ रहे थे, और उसकी जेब हमेशा खाली रहने लगी। जब पैसे खत्म होने लगे, तो उसने उधार लेना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह अपने परिवार से कटने लगा।

एक रात, जब वह पूरी तरह नशे में धुत था, उसकी बाइक एक ट्रक से टकरा गई। सौभाग्य से वह बच गया, लेकिन अस्पताल के बिस्तर पर पड़े हुए उसे पहली बार अहसास हुआ कि वह किस राह पर चल पड़ा है। माँ-पिता की आँखों में चिंता और बेबसी देखकर उसकी आत्मा काँप गई।

"बेटा, ये तेरा सपना था ना? तुझे एक बड़ा आदमी बनते देखना हमारा सपना था," उसके पिता की आँखों से आंसू छलक पड़े।

डॉक्टर ने उसे चेतावनी दी कि अगर उसने अपनी आदतें नहीं बदलीं, तो उसका शरीर जल्द ही जवाब दे देगा। यह सुनकर अर्जुन पहली बार डर गया। उसे अहसास हुआ कि वह सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि अपने माता-पिता की उम्मीदों को भी नष्ट कर रहा था।

इस हादसे ने उसे झकझोर कर रख दिया। उसने नशा मुक्ति केंद्र में जाने का फैसला किया। यह आसान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे उसने खुद को संभाल लिया। पुराने दोस्त छूट गए, पर एक नई जिंदगी की उम्मीद जग गई।

समय के साथ अर्जुन ने खुद को दोबारा खड़ा किया। उसने पढ़ाई में मन लगाया और अपने जीवन को सही दिशा में मोड़ने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे वह पहले जैसा अर्जुन बनने लगा, वही जो अपने माता-पिता की उम्मीद था, जो अपने सपनों को साकार करना चाहता था।

अर्जुन की कहानी कई युवाओं के लिए एक सबक बन गई। एक गिलास शराब से शुरू हुई यह यात्रा उसे बर्बादी के कगार तक ले गई थी, लेकिन एक सही निर्णय ने उसकी जिंदगी बदल दी।

उसने महसूस किया कि असली खुशी पल भर के नशे में नहीं, बल्कि जीवन के लक्ष्यों को पाने में है। आज वह शराब के बजाय सफलता का जाम पीता है, और हर किसी को यही संदेश देता है—"अपनी जिंदगी को एक नशे की लत से खत्म मत करो, बल्कि अपने सपनों की रौशनी में इसे जीओ।"

शराब एक चिंगारी की तरह होती है, अगर इसे संभाला नहीं गया तो यह पूरी जिंदगी को जला सकती है। लेकिन अगर समय रहते संभल जाया जाए, तो नई राहें खुल सकती हैं। तो क्या आप एक जाम से ज्यादा अपनी जिंदगी को अहमियत देंगे?

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