नई दिल्ली: राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर गुरुवार को जोरदार बहस हुई। चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और बिल में 139 संशोधन प्रस्तावित किए। बहस के दौरान बीजेपी सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी के भाषण पर विपक्ष ने हंगामा किया, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाला।
राज्यसभा में राजनीतिक समीकरण
राज्यसभा में इस समय 234 सदस्य हैं, जिसमें बहुमत के लिए 118 सांसदों का समर्थन आवश्यक है।
बीजेपी के पास अपने 96 सांसद हैं, और एनडीए के सहयोगी दलों के साथ यह संख्या 113 तक पहुंचती है।
6 मनोनीत सदस्य, जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में वोट करते हैं, एनडीए की ताकत 119 तक ले जाते हैं।
विपक्ष में कांग्रेस के 27 सांसद और अन्य विपक्षी दलों के 58 सदस्य हैं, जिससे कुल संख्या 85 बनती है।
BJD ने अपने सांसदों को स्वतंत्र रूप से मतदान करने की छूट दी है, जिससे बिल का भविष्य उनके रुख पर निर्भर करेगा।
संसद में किसने क्या कहा?
सुधांशु त्रिवेदी का सवाल: "किसने मांगा था वक्फ बोर्ड?"
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा,"आजादी के समय क्या किसी ने वक्फ बोर्ड की मांग की थी? फिर इसे क्यों बनाया गया? पहले मुस्लिम समुदाय को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, उस्ताद जाकिर हुसैन और कैफी आज़मी जैसे नामों से जाना जाता था, लेकिन अब यह इशरत जहां, मुख्तार अंसारी और दाऊद इब्राहिम तक सीमित हो गया है।"
अमित शाह का पलटवार
विपक्ष की आपत्तियों के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा,
"सुधांशु जी ने कुछ भी मुसलमानों के लिए नहीं कहा, बल्कि INDI गठबंधन के बारे में बात की। इशरत जहां को कांग्रेस और सहयोगी दलों ने शहीद बताया था, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी भी इन्हीं दलों से जुड़े रहे हैं।"
कांग्रेस और विपक्ष का विरोध
मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा,
"यह विधेयक अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए लाया गया है। अगर 1995 के कानून में बड़े सुधार किए जाते तो हम इसे स्वीकार कर सकते थे, लेकिन यहां सिर्फ राजनीतिक एजेंडा चलाया जा रहा है।"
कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया,
"अगर मेरी संपत्ति है, तो मैं जिसे चाहूं दान कर सकता हूं। सरकार यह तय करने वाली कौन होती है कि कौन वक्फ बना सकता है और कौन नहीं?"
देवेगौड़ा का समर्थन, जदयू में दरार
पूर्व प्रधानमंत्री और JD(S) प्रमुख एच.डी. देवेगौड़ा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा,
"वक्फ संपत्तियों की कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। अगर इनका दुरुपयोग हो रहा है, तो इसे रोकने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।"
हालांकि, JD(U) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद कासिम अंसारी ने नाराजगी जताते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल मच गई।
बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों के खिलाफ है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
अगला कदम: वोटिंग और मणिपुर पर चर्चा
राज्यसभा में बिल पर देर रात वोटिंग होगी, जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर से जुड़े एक अन्य विधेयक को पेश करेंगे। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता लाने का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला मान रहा है। अब सबकी निगाहें राज्यसभा की वोटिंग पर टिकी हैं, जो इस विधेयक का भविष्य तय करेगी।