एक नया आर्थिक आयाम

विनोद कुमार झा


भारत और चिली के बीच समग्र आर्थिक साझेदारी समझौता (सीपा) की घोषणा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है, जो दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है। चिली के राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिच फोंत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई इस वार्ता से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपने वैश्विक व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम बढ़ा रहा है। यह समझौता विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित है, जो भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

चिली विश्व में कापर और लिथियम उत्पादन में अग्रणी देश है। भारत, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा, सेमीकंडक्टर्स और रोबोटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में तेजी से प्रगति कर रहा है, ऐसे बहुमूल्य खनिजों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चिली के साथ सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है। यह समझौता भारतीय कंपनियों को चिली के खनन क्षेत्र में निवेश का अवसर प्रदान करेगा, जिससे दोनों देशों को पारस्परिक लाभ होगा।

इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर दोनों देशों ने सहमति जताई है। भारत और चिली के बीच कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में सहयोग से भारत की बढ़ती खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी। पेरू के बाद, चिली के साथ यह समझौता भारत की लैटिन अमेरिकी रणनीति को और मजबूती प्रदान करता है। यह इंगित करता है कि भारत अब केवल पारंपरिक व्यापारिक साझेदारों पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि नए क्षेत्रों में अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार कर रहा है। यह न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारत को वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

भारत और चिली के बीच अंटार्कटिका क्षेत्र में सहयोग की संभावना भी इस वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। चिली, जिसे अंटार्कटिका का प्रवेश द्वार माना जाता है, इस क्षेत्र में भारत के अनुसंधान प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है। यह सहयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, जलवायु अध्ययन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान करेगा। भारत और चिली के बीच समग्र आर्थिक साझेदारी समझौता (सीपा) केवल एक व्यापारिक करार नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की नींव है। यह समझौता ऊर्जा, खनिज, विज्ञान, कृषि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। भारत की यह पहल न केवल उसकी आर्थिक सुदृढ़ता को बढ़ाएगी, बल्कि उसे वैश्विक व्यापारिक व्यवस्था में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। यह समझौता भविष्य में दोनों देशों के लिए व्यापार और निवेश के नए दरवाजे खोलने वाला साबित होगा।

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