दिल-दिमाग और आँखों के लिए खतरनाक है आई-फोन

 आबिद हुसैन, खबर मार्निंग

हापुड़। अब घरों के आंगन में बच्चों की अठखेलियां कम ही दिखती हैं। उनके हाथों में मोबाइल रहता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि जब तक उन्हें मोबाइल न दो, तब तक वे खाना नहीं खाते हैं, उनका ज्यादातर वक्त मोबाइल पर रिल्स देखते गुजरता है। ऐसे में वो मोबाइल के आदी होते जा रहे हैं। जिला अस्पताल के मन कक्ष में ऐसे केस बढ़ रहे हैं। 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. अरशद के अनुसार मोबाइल पर स्क्रीन टाइम की समय-सीमा अधिक होने के चलते बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित होता है। हालांकि बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण के मामले बीते दो वर्षों से ही देखने को मिल रहे हैं। ऐसे मामलों में बच्चों के साथ ही परिजनों की काउंसिलिंग ज्यादा जरूरी होती है। उन्होंने बताया कि 50 में से 40 बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण मिल रहे हैं। इन्ही में से एक बच्चा गंभीर ऑटिज्म से ग्रसित मिल रहा है। ऐसे बच्चों की उम्र 5 से 10 साल है।

शारीरिक और मानसिक विकास होता है प्रभावित

मोबाइल या स्क्रीन की लत के कारण बच्चे का शारीरिक, मानसिक विकास प्रभावित होता है। उनमें ऑटिज्म जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं, जिसे वर्चुअल ऑटिज्म कहा जाता है। वर्चुअल ऑटिज्म की समस्या तीन से सात साल के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है। आजकल माता-पिता बच्चे को कम उम्र में मोबाइल फोन पकड़ा देते हैं, लेकिन इस आदत से बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने लगता है।

अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान

बच्चे का स्क्रीन टाइम सीमित करें, उसके साथ समय बिताएं, बच्चे को फोन से जानकारी देने के बजाय किताबों का इस्तेमाल करना सिखाएं, छोटे बच्चों को पिक्चर बुक देकर भी फोन से दूर रखा जा सकता है, बच्चे को पार्क में ले जाकर उसके साथ खेलकूद करें, इस बात का ख्याल रखें कि आपका बच्चा पूरी नींद ले।

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